प्रिय पाठकों और मित्रों,
आप सभी को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।
गणतंत्र दिवस केवल एक राष्ट्रीय पर्व नहीं, बल्कि हमारे संविधान, हमारे मूल्यों और हमारे नागरिक कर्तव्यों का उत्सव है। यह दिन हमें स्मरण कराता है कि स्वतंत्रता का वास्तविक अर्थ केवल भौगोलिक सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि विचारों की निर्भीकता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सत्य के पक्ष में खड़े होने का साहस भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
एक संपादक के रूप में मेरा दृढ़ विश्वास है कि लोकतंत्र तभी सशक्त होता है, जब समाज के हर वर्ग की आवाज़ को समान सम्मान और स्थान मिले। भारत की आत्मा उसकी ‘विविधता में एकता’ में बसती है—भाषा, संस्कृति, परंपरा और विचारों की बहुलता ही हमें एक राष्ट्र के रूप में विशिष्ट बनाती है।
‘साँचिया – सच की आवाज’ के माध्यम से हमारा सतत प्रयास रहा है कि हम समाज का निष्पक्ष दर्पण बनें, सच को बिना किसी भय या पक्षपात के आपके सामने रखें और जनहित से जुड़े मुद्दों को पूरी जिम्मेदारी के साथ उठाएँ। हमारा यह मंच केवल समाचारों का संकलन नहीं, बल्कि विचारों का संवाद और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का एक छोटा-सा प्रयास है।
हमें विश्वास है कि पाठकों और मित्रों का यह स्नेह, सहयोग और विश्वास आगे भी यूँ ही बना रहेगा। आइए, इस गणतंत्र दिवस पर हम सभी यह संकल्प लें कि अपने-अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करेंगे और राष्ट्र की प्रगति, सामाजिक समरसता व लोकतांत्रिक चेतना को मजबूत करने में अपना योगदान देंगे।
उम्मीद है कि हमारा यह साझा सफर देश की उन्नति और सशक्त लोकतंत्र की दिशा में एक सकारात्मक कदम सिद्ध होगा।
सादर,
कुमार विजय

कुमार विजय साँचिया के मुख्य संपादक हैं। पिछले 23 साल से पत्रकारिता, सिनेमा एवं रंगमंच से सम्बद्ध रहे हैं।

