राज्य

लखनऊ में विधानसभा घेराव: वाराणसी के कांग्रेसियों ने दिखाई ताकत

पुलिसिया बाधाओं को धता बताकर पहुँचे सैकड़ों कार्यकर्ता लखनऊ/वाराणसी। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर आज राजधानी लखनऊ में विधानसभा घेराव कार्यक्रम का आयोजन किया गया। प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के नेतृत्व में आयोजित इस विशाल प्रदर्शन में प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से आए कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराकर सत्ता […]

संघर्ष और शिक्षा का संगम है ‘सपनों की पगडंडियां’

अच्छा लेखन वही जिससे समाज को लाभ मिले : डॉ. रीता बहुगुणा जोशी वाराणसी। अशोका इंस्टीट्यूट के बुद्ध सभागार में वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक विजय विनीत की नई पुस्तक ‘सपनों की पगडंडियां’ का विमोचन संपन्न हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि, देश की प्रख्यात इतिहासकार एवं पूर्व सांसद डॉ. रीता बहुगुणा जोशी ने साहित्य और […]

हस्तक्षेप

साँचिया चौपाल से वाराणसी में नए वैचारिक विमर्श की शुरुआत

नागरिक समाज की मुखर आवाज बनेगी ‘साँचिया चौपाल’ : जगान्नाथ कुशवाहा वाराणसी न्यूज | सामाजिक विमर्श | साँचिया चौपाल वाराणसी। सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक संवाद को नया आयाम देने के उद्देश्य से साँचिया द्वारा 10 जनवरी 2026 को अर्दली बाजार स्थित कार्यालय में ‘साँचिया चौपाल’ का आयोजन किया गया। इस चौपाल में वाराणसी के सामाजिक, […]

आरएसएस के नेटवर्क बनाम धर्मनिरपेक्ष-लोकतांत्रिक ताकतें

सवेरा, अनुवाद : संजय पराते पहली बार, शोधकर्ताओं ने आरएसएस से जुड़े संगठनों के रहस्यमयी नेटवर्क की तस्वीर सामने लाने के लिए सबूत इकट्ठा किए हैं — और नतीजा परेशान करने वाला है। उन्होंने उन 2500 संगठनों के एक नेटवर्क का पता लगाया है, जिन्हें संघ से वैचारिक, संगठनात्मक और अक्सर आर्थिक मदद मिलती है। […]

स्त्री/बहुजन की शिक्षा एवं न्याय के पुरोधा लॉर्ड मैकाले

लॉर्ड मैकाले स्मृति दिवस चौ.लौटनराम निषाद स्त्री व बहुजन शिक्षा के क्रांतिदू नई शिक्षा नीति लागू कर बहुजनों की उन्नति एवं मुक्ति का द्वार खोलने वाले लॉर्ड मैकाले भले ही किसी और काम के लिए आलोचना के पात्र हों, किंतु बहुजनों के लिए मसीहा से कम नहीं हैं। 1813 में ब्रिटिश संसद ने प्रस्ताव पारित […]

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साँचिया

साँचिया सिर्फ एक समाचार पोर्टल नहीं बल्कि एक ज़िम्मेदारी है – सच की ज़िम्मेदारी। जब मीडिया का बड़ा हिस्सा सत्ता के साथ खड़ा हो और मीडिया की बहसें मुद्दों से भटककर मनोरंजन में तब्दील हो रही हों तब साँचिया पूरी जिम्मेदारी से उस समाज की आवाज बनने का प्रयास कर रहा है जिसे आजादी के गलियारे में भी अपमान और वंचना का शिकार होना पड़ रहा है। तब साँचिया अपने पाठकों को उस सच्चाई से जोड़ता है जो अक्सर जानबूझकर छुपा ली जाती है।

हमारी पत्रकारिता का सरोकार उन आवाज़ों से है जिन्हें बार-बार अनसुना किया गया है। हमारी पत्रकारिता का सरोकार उन सपनों से है जो ग्रामीण भारत की धूल भरी सड़कों पर बिखरे हैं, जो किसान की सूनी आँखों में हैं,  जो श्रमिक के पसीने में हैं, और जो उस आम नागरिक के सवालों में हैं, जिनका कोई जवाब नहीं देता।

हम मानते हैं कि  सच्ची पत्रकारिता वही है जो सत्ता से सवाल करे,  जो समाज के हर हिस्से को अपने हक की आवाज बुलंद करने का मंच बने और सच्चाई को विकृत करने के बजाय, उसे गंभीर सरोकार के साथ सामने लाए। आज जब मुख्यधारा की मीडिया के लिए “सच” एक उत्पाद बन गया है, तब साँचिया सच को आवाज़ देने का मंच बनना चाहता है।

आग्रह

अगर आप मानते हैं कि पत्रकारिता को जनता की आवाज़ बनना चाहिए,
अगर आप चाहते हैं कि मीडिया समाज के दबे-कुचले वर्गों का प्रतिनिधि बने,
तो “साँचिया” के साथ आइए।

साँचिया के साथ मिलकर एक ऐसी पत्रकारिता को मज़बूत कीजिए जो न सिर्फ खबर दिखाए, बल्कि सच कहे – बिना किसी डर या दबाव के।

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