सिर्फ प्रतिरोध और आंदोलनों से चीजें नहीं बदलती : अनामिका

मज़कूर आलम दिल्ली। जनवादी लेखक संघ, दिल्ली ने 25 नवम्बर से 10 दिसम्बर तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे ‘लैंगिक-आधारित हिंसा के विरुद्ध 16 दिवसीय सक्रियता अभियान के मौके पर को हरकिशन सिंह सुरजीत भवन, दिल्ली में ‘लैंगिक हिंसा : पहचान, प्रतिरोध, कानून’ विषय पर एक-दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यक्रम की शुरुआत हाल ही […]

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मुसहर समाज: मजदूर से मालिक बनने की जंग

भारत के किसी भी हिस्से में आपको मुसहर और नट समाज के लोग मिल जाएंगे। माना कि इनकी संख्या कम है लेकिन इसका दूसरा सुखद पक्ष यह है कि यह इस समाज में अब धीरे धीरे चेतना का विस्तार हो रहा है। भारत के सबसे उपेक्षित माने जाने वाले मुसहर और नट समाज की किस्मत […]

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सब कुछ सीखा हमने ना सीखी होशियारी

राजीव यादव गीतकार शैलेंद्र की जयंती पर विशेष जिन्दगी के मायने जिसने आखों से देख अपने जेहन और कलम से अपने गीतों में उकेरा एक ऐसा ही नाम शैलन्द्र का है। ‘तू जि़न्दा है तो जि़न्दगी की जीत में यकीन कर, अगर कहीं है तो स्वर्ग तो उतार ला ज़मीन पर’ 1950 में लिखे इस […]

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मुंशी प्रेमचंद की कहानी बड़े भाई साहब

मेरे भाई साहब मुझसे पॉँच साल बडे थे, लेकिन तीन दरजे आगे। उन्‍होने भी उसी उम्र में पढना शुरू किया था जब मैने शुरू किया; लेकिन तालीम जैसे महत्‍व के मामले में वह जल्‍दीबाजी से काम लेना पसंद न करते थे। इस भवन कि बुनियाद खूब मजबूत डालना चाहते थे जिस पर आलीशान महल बन […]

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