Premchand: The immortal legacy of a great litterateur

प्रेमचंद: एक महान साहित्यकार की अमर विरासत

साहित्य में यथार्थ और संवेदना का संगममुंशी प्रेमचंद (1880-1936) हिंदी और उर्दू साहित्य के ऐसे युग-प्रवर्तक साहित्यकार हैं, जिन्होंने अपनी लेखनी के माध्यम से भारतीय समाज के यथार्थ, उसकी कमियों, और मानवीय संवेदनाओं को इतनी गहराई से उकेरा कि उनकी रचनाएँ आज भी प्रासंगिक हैं। प्रेमचंद की लेखनी का वैशिष्ट्य उनकी सादगी, सामाजिक चेतना और […]

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