पिंडरा। संपूर्ण समाधान दिवस के अवसर पर एसडीएम प्रतिभा मिश्रा द्वारा मुसर समुदाय के करन और ज्योति प्रजापति को पुलिस द्वारा गिरफ्तार करवा लिया गया। हालांकि उन्हें दो घंटे बाद छोड़ दिया गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार पिंडरा तहसील, वाराणसी में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस के अवसर पर ग्राम जगदीशपुर, गजेन्द्रा, रायतारा, विक्रमपुर, बेलवा, फत्तूपुर, रमई पट्टी एवं धरसौना से आए मुसहर समुदाय की महिलाएं एवं पुरुष अपने मूलभूत अधिकारों की मांग को लेकर उपस्थित हुए। समुदाय द्वारा घरौनी प्रमाण पत्र एवं भूमि आवंटन की मांग से संबंधित लिखित दरख़ास्त उप-जिलाधिकारी को सौंपने का प्रयास किया गया।
समुदाय का आरोप है कि एसडीएम महोदया ने प्रार्थना पत्र लेने से इनकार कर दिया और अपमानजनक शब्दों में कहा कि “आप लोगों को घरौनी नहीं मिलेगा, बार-बार क्यों आ जाते हैं।” इस व्यवहार से समुदाय के लोगों में गहरा आक्रोश और निराशा व्याप्त हो गई।
मौके पर मौजूद नट समुदाय संघर्ष समिति के कार्यकर्ता करन मुसहर एवं ज्योति प्रजापति द्वारा जब शांतिपूर्ण तरीके से समुदाय के पक्ष में बात रखी गई, तो प्रशासन द्वारा उन्हें यह कहते हुए गिरफ्तार कर लिया गया कि “आप लोग ऐसा क्यों कर रहे हैं।”
जब समुदाय को करन मुसहर एवं ज्योति प्रजापति की गिरफ्तारी की जानकारी मिली, तो समुदाय के लोग आक्रोशित हो उठे और यह कहते हुए आवाज़ बुलंद करने लगे कि “अगर अपने हक की बात करना अपराध है तो हमें भी गिरफ्तार किया जाए।” इसके बाद समुदाय के लोग एसडीएम कार्यालय के बाहर शांतिपूर्ण ढंग से धरने पर बैठ गए और अपने साथियों की रिहाई की मांग करने लगे।
इस दौरान एसडीएम द्वारा ज्योति प्रजापति पर समुदाय को गुमराह करने का आरोप लगाया गया। इस पर समुदाय के लोगों ने स्पष्ट कहा कि कोई उन्हें गुमराह नहीं कर रहा, बल्कि वे स्वयं अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। समुदाय ने यह भी कहा कि यदि उन्हें घरौनी प्रमाण पत्र दे दिया जाए, तो किसी प्रकार का संघर्ष करने की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी।
आरोप है कि एसडीएम द्वारा समुदाय को यह कहते हुए धमकाया गया कि “आप लोग सड़क के किनारे जाकर बस जाइए, उसके लिए हम कार्यवाही करेंगे।” इस पर समुदाय का कहना है कि वे पिछले कई दशकों से, लगभग पाँच पीढ़ियों से उसी स्थान पर बसे हुए हैं, और अब उनके पास जाने के लिए कोई अन्य स्थान नहीं है। एसडीएम द्वारा यह भी कहा गया कि “अभी सर्वे लॉक है, जब सर्वे होगा तब घरौनी मिलेगा।”
इस दौरान दो पुलिस इंस्पेक्टरों द्वारा करन मुसहर को पकड़कर एसडीएम कार्यालय ले जाया गया तथा आरोप है कि दोनों कार्यकर्ताओं के मोबाइल फोन भी जब्त कर लिए गए।
समुदाय की एकजुटता और दबाव के परिणामस्वरूप, लगभग दो घंटे तक शांतिपूर्ण धरना दिए जाने के बाद प्रशासन द्वारा करन मुसहर एवं ज्योति प्रजापति को रिहा किया गया। हालांकि इस पूरी प्रक्रिया में समुदाय को अनावश्यक भय, अपमान और मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा।
नट समुदाय संघर्ष समिति के प्रेम कुमार नट कहते हैं घरौनी प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए मुसहर और नट समुदाय कब तक अधिकारियों से कब तक अपमानित होता रहेगा? यह एक प्रकार से दलित एवं वंचित समुदायों की लोकतांत्रिक आवाज़ को दबाने का प्रयास है। समिति का स्पष्ट कहना है कि घरौनी प्रमाण पत्र एवं भूमि आवंटन संविधान प्रदत्त अधिकार हैं, और इन्हें मांगना कोई अपराध नहीं है।
नट समुदाय संघर्ष समिति के अध्यक्ष प्रेम कुमार नट मांग करते बोले हमारी मांग है कि समुदाय के साथ किए गए अपमानजनक, दमनकारी एवं असंवैधानिक व्यवहार की निष्पक्ष जांच हो जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।
सभी पात्र परिवारों को शीघ्र घरौनी प्रमाण पत्र एवं भूमि आवंटन सुनिश्चित किया जाए।
चेतावनी देने वाले अंदाज में प्रेम कुमार नट बोले यदि प्रशासन द्वारा समुदाय की जायज़ मांगों पर शीघ्र सकारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो नट समुदाय संघर्ष समिति एवं प्रभावित समुदाय शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक आंदोलन के लिए बाध्य होंगे, जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

राहुल यादव ‘साँचिया – सच की आवाज’ के सह संपादक हैं।

