कांग्रेस का मनरेगा बचाओ संग्राम : गांधी प्रतिमा पर दर्ज हुआ जनविरोधी नीतियों के खिलाफ विरोध

आंदोलन राजनीति

वाराणसी। मनरेगा योजना को कमजोर किए जाने और ग्रामीण मजदूरों के संवैधानिक अधिकारों पर हो रहे हमले के विरोध में 11 जनवरी को मैदागिन टाउनहाल स्थित राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास मनरेगा बचाओ संग्राम कार्यक्रम के अंतर्गत जिला/महानगर कांग्रेस कमेटी द्वारा उपवास रखकर विरोध दर्ज कराया गया।

कार्यक्रम से पूर्व मोदी–योगी सरकार के इशारे पर प्रशासन द्वारा कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को कार्यक्रम में शामिल होने से रोकने के लिए उनके आवासों को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय, जिलाध्यक्ष राजेश्वर सिंह पटेल, महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे, महानगर युवा कांग्रेस अध्यक्ष चंचल शर्मा, नेता पार्षद दल गुलशन अंसारी, वरिष्ठ नेता सतनाम सिंह समेत कई नेताओं को हाउस अरेस्ट करने का प्रयास किया गया।
इसके बावजूद प्रदेश अध्यक्ष अजय राय, जिलाध्यक्ष राजेश्वर सिंह पटेल एवं महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे उपवास स्थल पर पहुँचे और लोकतांत्रिक तरीके से उपवास रखकर सरकार के तानाशाही रवैये और मनरेगा विरोधी नीतियों के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि मनरेगा सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि करोड़ों ग्रामीण मजदूरों के लिए काम की कानूनी गारंटी है। इसे कमजोर करना रोज़गार, सम्मान और गांवों के अधिकारों पर सीधा हमला है।

उपवास कार्यक्रम में मुख्य उपस्थिति प्रदेश अध्यक्ष अजय राय जी की रहीकार्यक्रम का अध्यक्षता जिलाध्यक्ष राजेश्वर सिंह पटेल ने व सयोजन महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे ने किया

  • काम का कानूनी अधिकार सुरक्षित रखा जाए
  • प्रत्येक कार्य की पूरी मज़दूरी समय पर दी जाए
  • पंचायतों के अधिकार मज़बूत कर बहाल किए जाएँ
  • VB-GRAM-G कानून को तत्काल वापस लिया जाए

….संविधान से मिला काम का अधिकार, मनरेगा की बहाली से ही बचेगा।

मनरेगा केवल एक सरकारी योजना नहीं है, बल्कि यह संविधान से मिले काम के अधिकार की गारंटी है। आज मोदी–योगी सरकार जानबूझकर मनरेगा को कमजोर कर रही है ताकि गांवों में रोज़गार खत्म हो, पलायन बढ़े और गरीब मजदूर अपने अधिकारों से वंचित हो जाएँ। समय पर मजदूरी न देना, काम की मांग के बावजूद काम न उपलब्ध कराना और पंचायतों के अधिकारों को छीनना पूरी तरह मजदूर विरोधी मानसिकता को दर्शाता है।आज कांग्रेस का शांतिपूर्ण उपवास और गांधीवादी तरीका भी सरकार को असहज कर रहा है। इसलिए नेताओं और कार्यकर्ताओं को पुलिस के ज़रिए डराने और घरों में बंद करने का प्रयास किया गया। यह सीधे-सीधे लोकतंत्र और संविधान पर हमला है। कांग्रेस पार्टी इस दमन से डरने वाली नहीं है। जब तक मनरेगा को पूरी मजबूती के साथ बहाल नहीं किया जाता और गरीबों को उनका हक नहीं मिलता, तब तक हमारा संघर्ष जारी रहेगा।

भाजपा सरकार की नीतियाँ पूरी तरह जनविरोधी हैं। मनरेगा के माध्यम से गांव के गरीब, दलित, पिछड़े और मजदूर परिवारों को सम्मानजनक रोजगार मिलता है, लेकिन सरकार इस योजना को खत्म करने की साजिश कर रही है। मजदूरों की मजदूरी महीनों तक रोक दी जाती है, काम की मांग के बावजूद रोजगार नहीं दिया जाता और पंचायतों को शक्तिहीन किया जा रहा है।आज उपवास जैसे अहिंसात्मक आंदोलन से सरकार की घबराहट साफ दिखाई दी। कांग्रेस नेताओं के घरों को पुलिस छावनी में तब्दील कर देना इस बात का प्रमाण है कि सरकार सच से डर रही है। कांग्रेस पार्टी गांव, गरीब और मजदूर के साथ खड़ी है और मनरेगा बचाने की यह लड़ाई हर गांव और हर पंचायत तक ले जाई जाएगी।

मनरेगा योजना ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया है और करोड़ों परिवारों का जीवन बचाया है। भाजपा सरकार लगातार ऐसी नीतियाँ लागू कर रही है, जिससे मनरेगा धीरे-धीरे निष्प्रभावी हो जाए। VB-GRAM-G जैसे कानून लाकर पंचायतों के अधिकार छीने जा रहे हैं और मजदूरों के हितों को नुकसान पहुँचाया जा रहा है।कांग्रेस पार्टी गांधी जी के सिद्धांतों पर चलते हुए शांतिपूर्ण तरीके से संघर्ष कर रही है, लेकिन सरकार हर आवाज़ को दबाने के लिए पुलिसिया दमन का सहारा ले रही है। हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि कांग्रेस डरने वाली नहीं है। मनरेगा, पंचायत और मजदूरों के अधिकारों की रक्षा के लिए कांग्रेस का संघर्ष लगातार और और तेज़ होगा।
उपवास कार्यक्रम में प्रदेश अध्यक्ष अजय राय , जिलाध्यक्ष राजेश्वर सिंह पटेल , महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे,प्रजानाथ शर्मा,दुर्गा प्रसाद गुप्ता,संजीव सिंह,फसाहत हुसैन बाबू,विनोद सिंह,गिरीश पाण्डेय,राजीव गौतम,देवेन्द्र सिंह,मयंक चौबे,राजेश त्रिपाठी,अशोक सिंह,संतोष चौरसिया,प्रमोद वर्मा,मनोज वर्मा,नरसिंह दास हसन मेहदी कब्बन,आशिष केशरी,घनश्याम सिंह,असलम खां,पियूष श्रीवास्तव,आकाश त्रिपाठी, कुँवर यादव,मनीष सिंह,संतोष मौर्य शीतल सिंह,अनुज यादव,कीर्ति पाण्डेय, अनिल पटेल रामजी गुप्ता,समेत सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित रहे।।

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