ज्योतिर्मठ पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर फर्जी मुकदमे के विरोध में कांग्रेस का शंखनाद, प्रधानमंत्री को सौंपा ज्ञापन

राज्य राजनीति

वाराणसी। प्रदेश नेतृत्व के निर्देशानुसार जिला/महानगर कांग्रेस कमेटी, वाराणसी द्वारा ज्योतिर्मठ पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती एवं उनके शिष्यों पर दर्ज कथित फर्जी मुकदमे के विरोध में माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित एक विस्तृत ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से सौंपा गया। कांग्रेस ने पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग की है।

ज्ञापन सौंपने से पूर्व कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शंख बजाकर शंखनाद किया और संत समाज के सम्मान की रक्षा का संकल्प लेते हुए जिला मुख्यालय तक मार्च किया। कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि शंकराचार्य जी के विरुद्ध किसी भी प्रकार की दमनात्मक कार्रवाई की गई, तो कांग्रेस पार्टी इसका पुरजोर विरोध करेगी और लोकतांत्रिक तरीके से व्यापक आंदोलन छेड़ेगी।

कांग्रेस कमेटी द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि अमावस्या जैसे पावन अवसर पर शंकराचार्य जी एवं उनके शिष्यों को पुलिस द्वारा स्नान से रोका जाना, उनके साथ कथित रूप से अपमानजनक व्यवहार किया जाना तथा बाद में गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज किया जाना अत्यंत निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण है। यह घटना न केवल एक व्यक्ति विशेष, बल्कि पूरे संत समाज और सनातन परंपरा की गरिमा से जुड़ा संवेदनशील विषय है।

इस अवसर पर महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे ने कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 प्रत्येक नागरिक एवं धार्मिक संप्रदाय को धार्मिक स्वतंत्रता और प्रबंधन का अधिकार प्रदान करते हैं। ऐसे में सनातन परंपरा के सर्वोच्च आध्यात्मिक पद पर आसीन शंकराचार्य के साथ इस प्रकार का व्यवहार संवैधानिक भावना के विपरीत है और सरकार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि पूरा घटनाक्रम प्रथम दृष्टया योजनाबद्ध प्रतीत होता है। पहले कथित अपमानजनक व्यवहार और फिर गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज किए जाने से संत समाज की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने की आशंका प्रबल होती है। कांग्रेस पार्टी ने इस कार्रवाई को दुर्भावनापूर्ण बताते हुए कड़े शब्दों में निंदा की।

कांग्रेस पार्टी ने प्रधानमंत्री से मांग की है कि पूरे प्रकरण की जांच किसी सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की निगरानी में समयबद्ध एवं पारदर्शी ढंग से कराई जाए। साथ ही एफआईआर दर्ज कराने वालों की पृष्ठभूमि की भी निष्पक्ष जांच हो तथा यदि जांच में षड्यंत्र या सत्ता के दुरुपयोग के प्रमाण मिलते हैं तो दोषियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि कानून का शासन सर्वोपरि है, लेकिन कानून के नाम पर किसी संत या धार्मिक परंपरा का अपमान किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। यदि शीघ्र निष्पक्ष जांच प्रारंभ नहीं हुई तो कांग्रेस पार्टी चरणबद्ध आंदोलन चलाने को बाध्य होगी और इस मुद्दे को सड़क से लेकर सदन तक उठाया जाएगा।

उक्त अवसर पर राघवेंद्र चौबे, फसाहत हुसैन, दुर्गा प्रसाद गुप्ता, सतनाम सिंह, विनोद सिंह, अशोक सिंह, गिरीश पाण्डेय, वकील अंसारी, मनीष मोरोलिया, ओमप्रकाश ओझा, राजू राम, हसन मेहदी कब्बन, राजेश त्रिपाठी, संतोष चौरसिया, अब्दुल हमीद डोडे, प्रमोद वर्मा, हाजी इस्लाम, नरसिंह दास, संजय चौबे, आशिष केशरी, लक्ष्मी यादव, मनोज चौबे, पुलक त्रिपाठी, विनय जायसवाल, गोपाल पटेल, इमरान सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।

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