क्या आप दिलो-दिमाग से स्वतंत्र होने का वजूद महसूस करते हैं ..?

शूद्र शिवशंकर सिंह यादव स्वतंत्रता के 78 साल पूरा होने पर देश के सभी भारतवासियों को इस शुभ अवसर पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाए, लेकिन अफसोस के साथ। इन 78 सालों में देश की प्रगति और परिस्थितियों को देखते हुए स्वतंत्रता से पहले और बाद की परिस्थितियों पर संक्षेप में प्रकाश डालना उचित समझता हूं। […]

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India was divided on the basis of secularism and not religion

भारत का बटवारा धर्म नहीं धर्मनिरपेक्षता के आधार पर हुआ था

शाहनवाज़ आलम यह बात एक आम धारणा का रूप ले चुकी है कि देश का बटवारा धर्म के आधार पर हुआ था। इस धारणा से दो तर्क मजबूत होते हैं। पहला कि भारत एक हिन्दू आबादी वाला देश था और उसकी अल्पमत मुस्लिम आबादी ने इस्लाम के नाम पर अपना हिस्सा ‘पाकिस्तान’ ले लिया। इसलिए […]

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धर्म, राजनीति और जातीय ध्रुवीकरण के चौराहे पर पीडीए

अखिलेश यादव के गृह प्रवेश और ब्राह्मणों के निष्कासन की घटना सिर्फ “सवर्ण बनाम पीडीए” नहीं, बल्कि “राजनीतिक वर्चस्व बनाम धार्मिक स्वतंत्रता” की नई बहस को जन्म दे रही है। कुमार विजय उत्तर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गई है, जहां धार्मिक कर्मकांड, जातीय पहचान और राजनीतिक विचारधारा की […]

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You will soon feel ashamed to speak English

शर्म तो ज्ञान पर आएगी, न कि अंग्रेज़ी पर!

अरुण माहेश्वरी 19 जून के ‘टेलिग्राफ’ के अनुसार अमित शाह ने कहा है कि लोग अंग्रेज़ी बोलने से जल्द ही शर्म करेंगे ; अर्थात् हमारे अनुसार, लोग अपने ज्ञान और प्रश्न उठाने की क्षमता पर शर्म करेंगे! हम उनके इस कथन को एक तानाशाह के ‘आज्ञापालक समाज’ के गठन का सपना कहेंगे। ‘आज्ञापालक समाज’ एक […]

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सुप्रीम कोर्ट द्वारा नई शिक्षा नीति खारिज, अब वास्तविक विकल्प पर विचार का समय

रामदास प्रीनी शिवनंदन मई 2025 में तमिलनाडु, केरल और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 को लागू करने की मांग करने वाली याचिका को सुप्रीम कोर्ट द्वारा खारिज किए जाने का स्वागत किया जाना चाहिए। सर्वोच्च न्यायालय ने यह कहा है कि वह राज्यों को नई शिक्षा नीति लागू करने के […]

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Operation Sindoor

आखिर क्यों जरूरी है संसद का विशेष सत्र ?

एम ए बेबी, अनुवाद : संजय पराते ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में ‘विराम’ के बाद सरकार द्वारा तथाकथित ‘राजनयिक पहुंच’ के तहत भेजे गए सभी सात संसदीय प्रतिनिधिमंडल वापस आ गए हैं। अपनी गंभीर आपत्तियों और सवालों के बावजूद, सीपीआई(एम) ने सरकार के अनुरोध को स्वीकार किया और इनमें से एक प्रतिनिधिमंडल में भाग भी लिया। सरकार […]

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Neither vermilion in every house, nor Modi in every house!

न घर-घर सिंदूर, न हर-हर मोदी!

राजेंद्र शर्मा इन विरोधियों को क्या कहें, बताइए खामखां में अच्छे-भले ‘‘घर-घर सिंदूर’’ प्रोग्राम में ही भांजी मार दी। घर-घर सिंदूर को लेकर ऐसी हाय-हाय मचायी, ऐसी हाय-हाय मचायी कि मोदी पार्टी को प्रोग्राम ही छोड़ना पड़ गया। प्रोग्राम छोड़ने तक बात रहती, तो फिर भी गनीमत थी। बेचारों को अपने ही प्रोग्राम को फेक […]

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Sharmishtha Panoli

वाकई खतरे में लोकतंत्र, अब मामला शर्मिष्ठा पनोली का

संजय पराते लगता है हमारी सरकार और न्यायपालिका के लिए सांप्रदायिकता, वैमनस्यता और धार्मिक भावनाओं को आहत करने के पैमाने अलग-अलग लोगों के लिए अलग-अलग है। सत्ताधारी पार्टी से जुड़े नेताओं के लिए अलग और बाकी विपक्षियों और आम जनता के लिए अलग। अब डॉ. अली खान मेहमूदाबाद के बाद शर्मिष्ठा पनोली का नया मामला […]

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Meaning of the attack on Dr. B.R. Ambedkar's statue

डॉ. बी आर अम्बेडकर की मूर्ति पर हमले के मायने

बादल सरोज मप्र हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ के परिसर में डॉ. बी आर अम्बेडकर की मूर्ति लगाने के सवाल पर हो रहे विरोध को सिर्फ स्वयं को वकील बताने वाले चंद कुंदबुद्धि, जातिवादी, लम्पट और स्तरहीन व्यक्तियों की खुराफात समझना गलत समझदारी होगी। निशाने पर सिर्फ मूर्ति भर नहीं है, निशाने पर सिर्फ बाबा साहब […]

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What is vermillion?

जो रगों में ही न दौड़ा, तो फिर सिंदूर क्या है ?

राजनैतिक व्यंग्य राजेंद्र शर्मा चचा गालिब से दोहरी माफी के साथ। एक माफी तो उनके शेर की पैरोडी करने के लिए। दूसरी माफी, पैरोडी में भी शेर की टांग तोड़ने के लिए। कहां चचा का रगों में दौड़ने-फिरने का कायल नहीं होना और लहू के आंख से टपकने की डिमांड करना और कहां हमारा सिंदूर […]

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