पिंडरा| वाराणसी जनपद की पिंडरा तहसील पर विमुक्त, घुमंतू, अर्धघुमंतू (DNT), नट एवं मुसहर समुदाय के चकिंदर, फत्तूपुर, विक्रमपुर एवं लठिया गांवों से आए लगभग 10–12 लोगों ने अपनी मूलभूत समस्याओं को लेकर तहसील प्रशासन को ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन के माध्यम से समुदाय के लोगों ने भूमि आवंटन, शौचालय निर्माण, आवास सुविधा, स्वच्छ पेयजल हेतु हैंडपंप स्थापना जैसी बुनियादी मांगों को उठाया। उन्होंने बताया कि वर्षों से ये समुदाय सामाजिक-आर्थिक उपेक्षा का शिकार हैं और आज भी सरकारी योजनाओं का लाभ पूरी तरह नहीं मिल पा रहा है।
इस अवसर पर समुदाय की महिलाओं की भी सक्रिय भागीदारी रही। ज्ञापन सौंपने के दौरान रीना, पार्वती, उषा, अर्धाना, रेखा, इमरती, अनीता, सोनी, टीजा सहित अन्य महिलाएं उपस्थित रहीं। साथ ही नट समुदाय संघर्ष समिति की कार्यकर्ता मीना देवी भी कार्यक्रम में मौजूद रहीं।
इस मौके पर नट समुदाय संघर्ष समिति का उल्लेख किया गया, जो वर्ष 2005 से विमुक्त, घुमंतू, अर्धघुमंतू, नट एवं मुसहर समुदाय के अधिकारों के लिए निरंतर कार्य कर रही है। समिति के अध्यक्ष प्रेम नट के नेतृत्व में संगठन बीते दो दशकों से इन समुदायों के संवैधानिक एवं सामाजिक अधिकारों की लड़ाई को मजबूती से आगे बढ़ा रहा है।

नट समुदाय संघर्ष समिति एक जनसंगठन है, जो विशेष रूप से विमुक्त, घुमंतू एवं वंचित जातियों के हक-अधिकार, सम्मान और न्याय के लिए संघर्षरत है। समिति ने प्रशासन से मांग की कि ज्ञापन में उठाई गई समस्याओं पर शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई की जाए।लिए
नट समुदाय संघर्ष समिति के अध्यक्ष प्रेम कुमार नट ने बताया कि मुसहर एवं नट समुदाय से जुड़े लोगों की विभिन्न समस्याओं के निराकरण हेतु अभी तक पिंडरा तहसील में एक हजार ज्ञापन संबंधित अधिकारियों को सौपे जा चुके हैं।
यह भी देखें…
दुःखद यह है कि इसमें से सिर्फ 10-15 का ही निस्तारण हुआ है। सरकार की लाख कोशिशों के बावजूद अधिकारी अपनी कुम्भकर्णी नींद से जागने का नाम नहीं ले रहे हैं। मामले में कोई खास प्रगति होती नहीं दिख रही है।
नट समुदाय संघर्ष समिति के अध्यक्ष प्रेम कुमार नट बताते हैं देखा जाय तो राजातालाब तहसील में कुछ मुसहर और नट समुदाय के लोगों को अधिकारियों की मुस्तैदी के चलते घरौंनी मिल चुकी है लेकिन पिंडरा में अभी तक किसी को नहीं मिली।

राहुल यादव ‘साँचिया – सच की आवाज’ के सह संपादक हैं।

