नागरिक समाज की मुखर आवाज बनेगी ‘साँचिया चौपाल’ : जगान्नाथ कुशवाहा
वाराणसी न्यूज | सामाजिक विमर्श | साँचिया चौपाल
वाराणसी। सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक संवाद को नया आयाम देने के उद्देश्य से साँचिया द्वारा 10 जनवरी 2026 को अर्दली बाजार स्थित कार्यालय में ‘साँचिया चौपाल’ का आयोजन किया गया। इस चौपाल में वाराणसी के सामाजिक, सांस्कृतिक, साहित्यिक संगठनों के साथ-साथ विपक्षी राजनीतिक दलों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। कार्यक्रम का उद्देश्य विभिन्न विचारधाराओं के बीच संवाद की साझा जमीन तैयार करना रहा।
संगठन नहीं, साझा विमर्श का मंच : प्रो. महेश विक्रम
वरिष्ठ इतिहासकार प्रो. महेश विक्रम ने कहा कि साँचिया चौपाल किसी संगठन निर्माण की भूमिका नहीं निभा रही है, बल्कि यह उन संगठनों और व्यक्तियों के बीच साझा संवाद विकसित करने का प्रयास है, जो एक बेहतर और न्यायपूर्ण समाज के निर्माण के लिए संघर्षरत हैं।
वाराणसी से नए विमर्श की संभावना : डॉ. लेनिन रघुवंशी
वरिष्ठ मानवाधिकार कार्यकर्ता डॉ. लेनिन रघुवंशी ने कहा कि वाराणसी कबीर की परंपरा वाला शहर है, जो अपने प्रतिरोधी स्वभाव के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन वर्तमान समय में यह शहर वैचारिक शून्यता से गुजरता प्रतीत होता है। ऐसे में साँचिया चौपाल के माध्यम से वाराणसी से नए विमर्श की शुरुआत संभव है। उन्होंने इस पहल को समय की आवश्यकता बताया।

तानाशाही दौर में संवाद जरूरी : संजीव सिंह
कांग्रेस प्रवक्ता संजीव सिंह ने कहा कि मौजूदा समय तानाशाही प्रवृत्तियों का दौर है। ऐसे समय में प्रतिरोधी ताकतों के बीच संवाद को बढ़ावा देने वाली साँचिया चौपाल जैसी पहल का स्वागत किया जाना चाहिए।
किसान सवालों को विमर्श के केंद्र में लाने की जरूरत : राम जनम यादव
किसान नेता राम जनम यादव ने कहा कि मौजूदा समय में किसानों के सवाल लगातार हाशिये पर धकेले जा रहे हैं। खेती, लागत, न्यूनतम समर्थन मूल्य, भूमि अधिग्रहण और ग्रामीण संकट जैसे मुद्दों पर गंभीर संवाद की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि साँचिया चौपाल जैसे मंच किसानों की आवाज को शहर और सत्ता के केंद्र तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। यदि यह चौपाल गांव, किसान और खेतिहर मजदूर के सवालों को नियमित रूप से अपने विमर्श का हिस्सा बनाती है, तो यह एक व्यापक और जनपक्षधर पहल के रूप में स्थापित होगी।
असहमति-सहमति के साथ संवाद जरूरी : मनीष शर्मा
वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता मनीष शर्मा ने कहा कि स्थानीय से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक कई ऐसे मुद्दे हैं, जिन पर गंभीर परिचर्चा की आवश्यकता है। साँचिया चौपाल असहमति और सहमति—दोनों का सम्मान करते हुए संवाद की परंपरा को आगे बढ़ा सकती है।
हाशिये के समाज की आवाज बनेगी चौपाल : प्रेम कुमार नट
नट और मुसहर समाज के अधिकारों के लिए संघर्षरत सामाजिक कार्यकर्ता प्रेम कुमार नट ने कहा कि इस चौपाल के माध्यम से हाशिये के समाजों के मुद्दों को मुख्यधारा के विमर्श में लाया जा सकेगा।
स्त्रियों के मुद्दों को भी मिले प्राथमिकता : जागृति राही
गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ता जागृति राही ने कहा कि यदि यह चौपाल स्त्रियों के मुद्दों, उनकी भागीदारी और स्वतंत्रता को अपने विमर्श का केंद्र बनाती है, तभी इसे एक सार्थक सामाजिक पहल माना जाएगा।
सामाजिक न्याय के पक्ष में माहौल बनेगा : डॉ. रणजीत सिंह यादव
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता डॉ. रणजीत सिंह यादव ने कहा कि साँचिया चौपाल सामाजिक न्याय के पक्ष में वातावरण निर्माण का एक प्रभावी माध्यम बनेगी। डॉ. अनूप श्रमिक ने भी इस साझा संवाद पहल का स्वागत किया।
गांव-शहर दोनों के मुद्दे होंगे शामिल : राम दुलार प्रजापति
वरिष्ठ अधिवक्ता राम दुलार प्रजापति ने कहा कि यह चौपाल खामोश समय में जनपक्षधर मुद्दों पर न्यायपूर्ण चिंतन को बढ़ावा देगी और शहर के साथ-साथ गांवों के सवालों को भी विमर्श का हिस्सा बनाएगी।
संवैधानिक मूल्यों की रक्षा का मंच : कुमार विजय
साँचिया चौपाल के सूत्रधार एवं आयोजन संचालक कुमार विजय ने कहा—
“यह चौपाल संवैधानिक मूल्यों को बचाने वाले समाज के निर्माण के उद्देश्य से शुरू की गई है। यह हर प्रकार के भेदभाव के खिलाफ सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक, ऐतिहासिक, साहित्यिक, कला, दर्शन, विज्ञान और अन्य रचनात्मक विधाओं से जुड़े चिंतकों को एक साझा मंच पर लाने के लिए प्रतिबद्ध रहेगी।”
उन्होंने बताया कि साँचिया चौपाल का आयोजन प्रत्येक माह के दूसरे शनिवार को किया जाएगा तथा युवाओं की रचनात्मक अभिव्यक्ति को भी सम्मानजनक अवसर दिया जाएगा।
वाराणसी के नागरिक समाज की मुखर आवाज : जगान्नाथ कुशवाहा
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता जगान्नाथ कुशवाहा ने कहा कि ‘साँचिया चौपाल’ वाराणसी के नागरिक समाज की मुखर आवाज बनेगी और सामाजिक-राजनीतिक हस्तक्षेप को मजबूत करेगी।
बड़ी भागीदारी, सकारात्मक संदेश
चौपाल में सीपीआई-एम के अमृत कुमार, साहित्यकार संदीप यादव, चित्रकार अमित मेहता, किसान नेता चौधरी राजेंद्र, वरिष्ठ पत्रकार शिवदास प्रजापति, वरिष्ठ अधिवक्ता राजेश यादव, शिक्षक विपिन सिंह, नीता मिश्रा, किसान न्याय मोर्चा के महेंद्र यादव सहित अनेक बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम का संयोजन डॉ. राहुल यादव ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. संजय सोनकर ने दिया।
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